Category: All Articles

  • शिक्षा, अर्थ व्यवस्था और स्वतन्त्रता (२/२)

    आर्थिक क्षेत्र के हर मोड़ के साथ शिक्षा का मोड़ साथ साथ चलता है और इसका सबसे घातक असर हमारे मूल्यों के ह्रास में दिखाई देता है; हमारे नैतिक पतन में दिखाई पड़ता है और किसी भी तरह से पैसा कमाने वाली प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन मिलने में दिखाई पड़ता है। यदि सट्टा और जुआ खेलना…

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  • शिक्षा, अर्थ व्यवस्था और स्वतन्त्रता (१/२)

    मैं समझता हूँ कि शिक्षा और अर्थ व्यवस्था के संबंध को पूरी तरह से समझना बहुत ज़रूरी है न कि सिर्फ़शिक्षक या शिक्षाविदों के लिए, लेकिन हम सबके लिए भी। ‘अर्थ व्यवस्था’ शब्दों से मैं शिक्षा के नाम पर होरही व्यापार या बिसनेस की बात नहीं कर रहा; मगर मैं उम्मीद करता हूँ, कि जब…

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  • भारतीय समाज व्यवस्था और उसका आर्थिक पक्ष, राष्ट्रीय संगोष्ठी – एक रिपोर्ट

    भारतीय समाज व्यवस्था और उसका आर्थिक पक्ष, राष्ट्रीय संगोष्ठी – एक रिपोर्ट

    मित्रों, आज जब भी भारतीय व्यवस्थाओं की बात होती है, तो अक्सर पदार्थों (ऑर्गेनिक भोजन, मिट्टी के मकान – बर्तन इत्यादि) तक बात सीमित रह जाती है और ये सब भी इतने महंगे में बिकता है, कि साधारण व्यक्ति के बस से तो बाहर ही हो चला है। लेन देन का एक मात्र माध्यम व्यापार…

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  • Bharathiya Shilpa Vyavastha (Part 8)

    Hence a Devalaya (Temple) was planned with so many considerations and not just as a Prayer Hall or just a Religious Place. Devalayas were places beyond just the site plan and the site plan was made to suit these uses, yet most of the Devalayas had a mysterious element associated with them too, like in…

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  • स्वाती जल – 2023

    स्वाती जल – 2023

    अश्विनी, भरणी आदि 27 नक्षत्रों में से सूर्य जिस नक्षत्र में होता है, उसे “सौर नक्षत्र” माना जाता है। सूर्य एक नक्षत्र में लगभग ११ से १३ दिन रहता है। एक साल में सूर्य सारे २७ नक्षत्रों से पार होता है। व्यवहार में जिन मृगादि नौ नक्षत्रों की गणना प्रचलित है, वो बारिश के सौर…

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  • देवालय निर्माण

    देवालय निर्माण

    जीवन में आपके समक्ष कौन कौन सी परिस्थिति उत्पन्न होगी, ये आपके अधिकार क्षेत्र से परे है, किन्तु उन परिस्थितियों को आप कौन से दृष्टिकोण से देखेंगे, ये तो आप ही निश्चित कर सकते हैं। पढ़िए *देवालय का निर्माण* अयोध्या स्थित *आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनी शरण जी* की कलम से।

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  • Bharathiya Shilpa Vyavastha (Part 7)

    Bharathiya Shilpa Vyavastha (Part 7)

    How can one describe temples? The Westerners might look at them as the Hindu Counterpart of the Church, but is it really so? Is a temple just a prayer hall or is there something more to it? Read Part 7 of Bharathiya Shilpa Vyavastha by Acharya Prashant V Kumar

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  • अयोध्या का पुनर्निर्माण?

    अयोध्या का पुनर्निर्माण?

    निर्माण सदा एक चुनौतीभरा कार्य होता है, पुनर्निर्माण उससे भी अधिक। जगत् का निर्माण करने वाले ब्रह्मा भी इसके लिये तप करते हैं और प्रलय के पूर्व की सृष्टि को पुनर्निर्माण का आधार बनाते हैं।

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  • Bharathiya Shilpa Vyavastha : Part 6

    Vaastu for living (Continued) House planning was done according to the locality (Farm or Garden or Village or Town or City): Depending on where the house is being built, the design of the house would change. 

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  • Bharathiya Shilpa Vyavastha : Part 5

    Vaastu for living This is an introduction to Vaastu as it was applied for residential places. It is an insight into what was the original science behind Vaastu, which is very different from the “Directional Vaastu” as is practised currently. “Vaastu Consultants” in the present-day, stick to only the directional principles of Vaastu forgetting almost…

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