• Bharathiya –  Non-Translatable words: 2. Dharma (& other)

    Bharathiya – Non-Translatable words: 2. Dharma (& other)

    This is series of Bharathiya words that are non translatable. First part talking about Sathya & Mithya of this series can be found here: https://saarthaksamvaad.in/bharathiya-non-translatable-words-1-intro/ 3. Dharma (धर्म): This word is very wrongly translated as religion or way of life. Dharma is from the “Dhar” root actually meaning “Upholding or Holding Up” and “ma” meaning…

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  • धर्म और हमारा साधारण समाज: भारतीय ग्राम व्यवस्था का सैद्धान्तिक आधार

    धर्म और हमारा साधारण समाज: भारतीय ग्राम व्यवस्था का सैद्धान्तिक आधार

    इस ज़माने में क्या काम करने योग्य है और उस काम को कैसे किया जाय? ये दो महत्त्वपूर्ण प्रश्न हैं। ऐसा सुना है कि लगभग १०० वर्ष पूर्व लेनिन ने भी ये दो प्रश्न पूछे थे – what is to be done और how it is to be done। इन प्रश्नों के उत्तर भी उन्होंने…

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  • Bharathiya –  Non-Translatable words: 1. Sathya-Mithya

    Bharathiya – Non-Translatable words: 1. Sathya-Mithya

    Namasthe.I am starting a series on some Bharathiya words /terminologies that are non-translatables. Most of the “English” translations are either too weak or many have been used and in a wrong context. I have prepared a list of almost 300 such words / terminologies, which will be published here time to time. When you change…

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  • प्रकृति का साथ और पर्यावरण की बात

    प्रकृति का साथ और पर्यावरण की बात

    प्रकृति का साथ और पर्यावरण की बात दोनों अलग-अलग चीजें हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत ही नहीं दुनिया भर में पर्यावरण बचाने की तमाम बातें होंगी, लेकिन प्रकृति के साथ जीने की बात नहीं होगी, क्योंकि प्रकृति के साथ जीने की बात करने वाले को वैसा जीकर स्वयं अनुभव कर के ही बात कहनी…

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  • Video Series: Deconstructing Modernity: (x) What is to be done?

    सत्य सामयिक नहीं होता, सत्य सनातन होता है, सब स्थानों पर सब समय में एक जैसा। आधुनिकता ने इस सत्य के अस्तित्व को नकार दिया है, यह बात चलाई जाती है कि सबका अपना अपना सत्य होता है, शाश्वत सनातन जैसा कुछ नहीं। सत्य को भी subjective बना दिया जाता है। सबसे पहले तो हमें…

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  • Video Series: Deconstructing Modernity: (ix) Stepping out of the Modern Paradigm – Swatantrata

    पिछले २०० – २५० वर्षों से मनुष्य को बहिर्मुखी बना दिया गया है, हमारी अपने ऊपर दृष्टि रही ही नहीं है, यदि कभी पड़ती भी है, तो भी केवल self consciousness के स्तर तक ही और वह भी केवल तुलना के माध्यम से। अपने भीतर क्या घटित हो रहा है, उसके उपर किसीका ध्यान ही…

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  • Video Series: Deconstructing Modernity: (viii) Entrapment in Material Realm

    शब्द और अर्थ एकदूसरे से जुड़े हुए हैं। शब्द की सार्थकता अर्थ के सही संप्रेषण में है, शब्द अर्थ के उपर निर्भर करता है। शब्द का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, जबकि अर्थ स्वयं में प्रमाणित है, अर्थ का शब्द के उपर आलंबन नहीं है।हमारा पूरा ध्यान अर्थ की दुनिया से हटकर शब्द की दुनिया के…

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (vii) Colonial Making of Contemporary Indian Mind

    सन 1824 में कलकत्ता के पास बेरेकपुर में भारतीय सैनिकों ने एक सैन्य विद्रोह किया था, जिससे अंग्रेज़ बहुत ही घबरा गए थे, लेकिन उसके चंद सालों में ही तत्कालीन गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने लंदन स्थित अपने उच्च अधिकारियों के नाम एक चिठ्ठी लिखी थी, जिसमें उसने लिखा था कि Now there is nothing…

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (vi) Civilizational Reliability on Test of Time

    किसी भी क्रिया के त्वरित परिणाम भी हो सकते हैं और दूरगामी भी हो सकते हैं। क्रिया के होते ही त्वरित परिणाम तो दिख जाते हैं, किन्तु दूरगामी असरों को जानने के लिए तो समय के साथ उसकी समीक्षा होती रहनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर आज यदि कोई कोरोना की दवाई निकाल कर कहे,…

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (v) Newness Seeking

    आधुनिक दिमाग एक भ्रम में जीता है। किसी बड़ी डिग्री वाले ने या किसी बड़े पुरस्कार विजेता ने कुछ कह दिया, तो वह उसे मान लेता है, उससे प्रभावित हो जाता है, अब चाहे वह खुद उस बात को समझता हो या ना हो। ये एक प्रकार की मान्यता है, परंपरा में भी मान्यता का…

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