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संस्कारों द्वारा पोषित हमारी अपनी सामाजिक (अर्थ)व्यवस्था (भाग ३/३)
भाग २ पढ़ने के लिए यहाँ click करें। समाज में सामाजिकता को पोषित करना: 49 संस्कारों वाली व्यवस्था को समाज में लागू करने का दूसरा सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में सामाजिकता को पोषित करना रहा है। हमारे 49 संस्कार, संस्कार मात्र न होकर मानव जीवन के महत्त्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं। गर्भाधान, वस्त्र धारण, अन्न प्राशन,…
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संस्कारों द्वारा पोषित हमारी अपनी सामाजिक (अर्थ) व्यवस्था (भाग २/३)
भाग १ पढ़ने के लिए यहाँ click करें। कारीगरों को इसी तरह का एक और पक्का मार्केट देने के उद्देश्य से समाज में 49 संस्कारों वाली एक अनूठी अर्थव्यवस्था लागू की गई थी। इन सभी 49 संस्कारों में हर कारीगर की, एक से लेकर पाँच (बिना जरूरत की) चीजें खरीदने की व्यवस्था की गई थी…
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संस्कारों द्वारा पोषित हमारी अपनी सामाजिक (अर्थ) व्यवस्था (भाग १/३)
हमारी लगभग सभी परम्पराओं के पीछे एक धार्मिक दृष्टि होने के साथ-साथ कुछ अन्य मूल कारण रहे हैं, जिन्हें समाज ने धार्मिकता के माध्यम से समाज में लागू किया है। इन महत्त्वपूर्ण कारणों में अर्थव्यवस्था का सुचारूपन, समाज में सामाजिकता का उत्तरोत्तर विकास, उस परम्परा का शारीरिक / आयुर्वेदीय महत्त्व, प्रकृति के साथ सामन्जस्य एवं…
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क्या आयुर्वेद वस्तुतः कोई गुप्त या गोपनीय शास्त्र है? (भाग २/२)
पारंपरिेक शोध की जहाँ तक गोपनीयता का प्रश्न है यह आरोप बेबुनियाद है। वास्तविकता यह है, कि एक वैद्य देश, काल, पात्र एवं रोग के अनुरूप औषध रचना में कितना दक्ष है यह उसके अनुभूत योग से प्रकट होता था। अनुभूत स्वतंत्र योगों का पहले चिकित्सकों के बीच आदान-प्रदान होता था। बाद में जब कोई…
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क्या आयुर्वेद वस्तुतः कोई गुप्त या गोपनीय शास्त्र है? (भाग १/२)
आयुर्वेद के विषय में एक विचित्र आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा है। यह वैसा ही आरोप है, जैसा आज से पचास – सौ वर्ष पहले योग एवं तंत्र पर लगा करता था और आज भी लगा करता है, जैसे कि; आयुर्वेद के ग्रंथ गोपनीयता की वकालत करते हैं। वैद्य अपनी विद्या को गुप्त रखते हैं। अनेक वैद्य…
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Bharathiya – Non-Translatable words: Part 8
The subjects that were taught at the Gurukuls were very specialized but unfortunately the subject names have been misrepresented or wrongly translated. Here I have made a sincere attempt to bring the correct meaning of the subjects and some terminologies too. 59. Vyakarana: Vyakarana is usually referred to as Grammar but Vyakarana is much more…
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‘सहयोग’ आधारित ग्राम की समृद्धि-व्यवस्था (भाग 3/3)
‘ऋण का भाव’ पैदा करने वाली व्यवस्था: समाज में हर तरह के काम के लिए ‘सहयोग की अर्थव्यवस्था’ ही व्याप्त रही है, जिसके माध्यम से समाज में एक तरह के ‘मानस निर्माण’ जैसे बहुत से उद्देश्य स्वतः ही सधते रहे हैं। पूरी व्यवस्था में एक-दूसरे के प्रति बनाई गई ‘परस्पर निर्भरता’ और ‘आपसी सहयोग’ का…
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‘सहयोग’ आधारित ग्राम की समृद्धि-व्यवस्था (भाग 2/3)
(गुरुजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी के साथ की बातचीत के आधार पर) ‘धन के हस्तांतरण’ के विभिन्न प्रकारों वाली व्यवस्था: जिस तरह हमारे समाज में ‘धन’ के ढेर सारे स्वरूप थे, उसी तरह हमारे समाज में धन के एक हाथ से दूसरे हाथ तक हस्तांतरण के भी बहुत सारे तरीके हुआ करते थे। आजकल तो…
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‘सहयोग’ आधारित ग्राम की समृद्धि-व्यवस्था (भाग 1/3)
(गुरुजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी के साथ की बातचीत के आधार पर) सामाजिक अर्थशास्त्र के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में हमारे समाज में वर्तमान आधुनिक समाज की तरह ‘धन की अर्थव्यवस्था’ न होकर ‘सहयोग की अर्थव्यवस्था’ रही है। जिस तरह आजकल समाज में ‘पैसों’ के बिना एक पत्ता तक नहीं हिल सकता, उसी तरह…
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भारत की समझ
भारत एक विशाल एवं विविधतापूर्ण देश है। यहाँ की संस्कृति भी अपने प्रकार की अलग ही है, जो विविधताओं से भरी है, फिर भी उन विविधताओं के बीच घनिष्ठ आत्मीय संबंध हैं। जैन और बौद्ध तो यहीं के हैं। इस संसार, ब्रह्मांड या जिसे अंग्रेजी में कॉस्मोस कहा जाता है, उसके बारे में सनातनी, जैन…
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