• आधुनिकता – गुरूजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी की दृष्टि से (२/५)

    आधुनिकता – गुरूजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी की दृष्टि से (२/५)

    ‘विविधता’ हमारी व्यवस्था में स्वाभाविक रूप से पोषित होती है। तथाकथित भौगौलिक परिस्थितियों में विविधता के अलावा भी भारतीय समाज में व्यवस्था-जनित अन्य ढेरों चीजें थीं, जिनके कारण हमारा समाज विविधतापूर्वक जीता था। आजकी आधुनिक व्यवस्था, भौगौलिक परिस्थितियों में पहले की तरह की ही विविधता होने के बावजूद भी, सब कुछ एक जैसा, एक समान…

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  • Ek Bharat Aisa Bhi: Episode 1 – Intro to the series

    Ek Bharat Aisa Bhi: Episode 1 – Intro to the series

    आज भी भारत के गाँवों में खुद रहे हजारों लाखों कुओं के लिए सेटेलाईट की कोई जरूरत नहीं पड़ती है, सिर्फ हाथ में नारियल लेकर पानी दिखाने वाले लोग गाँव गाँव में हैं, बिना मशीन के या बिना बैल की घाने के तेल निकालने वाले लोग भी हैं और ऐसे ही अनेक अजूबे आज भी…

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  • Pre-Launch Video of “Ek Bharat Aisa Bhi”

    Pre-Launch Video of “Ek Bharat Aisa Bhi”

    Dr Harsh Satya holds a PhD on the topic titled ‘Towards Revitalizing Diversity: A Study of the Traditional Jajmāni System in India’ from IIIT Hyderabad. Jajmāni System is an altogether different paradigm on socio economic fronts. While conducting his research, he happened to meet many illuminary personalities and societies in the hinterlands of rural and…

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  • आधुनिकता – गुरूजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी की दृष्टि से (१/५)

    आधुनिकता – गुरूजी श्री रवीन्द्र शर्मा जी की दृष्टि से (१/५)

    आधुनिकता या आधुनिक व्यवस्था, ये दोनों ही गुरूजी के अध्ययन विषय नहीं हैं। उनके अध्ययन का मुख्य विषय तो भारतीयता और भारतीय समाज व्यवस्था ही है। पंरतु, गुरूजी की बातचीत में आधुनिकता के बारे में जितना कुछ पता चलता है, उतना अन्य कहीं मिलता, कम से कम मेरे लिए तो मुश्किल ही जान पड़ता है।…

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  • अर्थ से शब्द की ओर (३/३)

    भाग – २ पढ़ने के लिए यहाँ click करें। स्थानीय परिवेश से शिक्षण के हमारे प्रयोग से हमने पाया, कि बच्चे पढ़ा – लिखा होने और शिक्षित होने के भेद को समझ पाये। उनके बुजुर्ग – जिनको वे अनपढ़ होने की वजह से, एक तरफ उन्हें तिरस्कार की नज़र से देखते थे और दूसरी तरफ…

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  • अर्थ से शब्द की ओर (२/३)

    भाग – १ पढ़ने के लिए यहाँ click करें। हमारी ग्रामीण महिलाएँ इसी बीमारी को या इसी दोष को अपने अंदाज़ में हमें बता रही थी, जब उन्होंने कहा “उन्हें होना सिखाओ, दिखना/ दिखाना नहीं”। हमारे लिए तो यह एक मंत्र भी और सूत्र भी जैसा बन गया, जिसने आगे की हर दिशा का मार्गदर्शन…

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  • अर्थ से शब्द की ओर (१/३)

    आज से करीब 30 वर्ष पहले पहाड़ के दूर दराज़ के गाँवों में, गाँव के लोगों के अनुरोध पर, हमने स्कूल खोले। उस समय औसतन 7-10 गाँवों के बीच एक सरकारी स्कूल हुआ करता था। पहाड़ के गाँव छोटे- छोटे और बिखरे हुए होते हैं। एक गाँव से दूसरे गाँव की दूरी तय करने में…

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  • Indian Village & The Jajmani System: Dr. Harsh Satya & Pranav Vasistha GV

    Indian Village & The Jajmani System: Dr. Harsh Satya & Pranav Vasistha GV

    Very little has been written about the intra village relations among people and the backbone of Indian village systems. Many of us do know that the paradigm of the modern day transaction centric business was (and to quite an extent is) not much practised within the Indian villages, what we often do not know is…

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  • Bharathiya – Non-Translatable words: Part 9

    This series includes some words or terminologies which are part of Bharathiya Adhyathmic Sampradaya (Bharathiya Spiritual Heritage). 67. Ahimsa: This word Ahimsa is usually translated or referred to as Non-Violence. Let us see what Ahimsa is. In the Yoga Sutra, Maharishi Patanjali says: अहिंसाप्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैर त्याग:॥ It means being in the presence of one…

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  • धरमपाल जी की चिंता: सहजता और आत्म विश्वास कैसे लौटे

    यह धरमपाल जी का शताब्दी वर्ष है। जगह जगह छोटे बड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। अभी 19 तारीख को धर्मपाल जी के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री ने शांति निकेतन, बंगाल में दिये अपने एक भाषण में शिवाजी जयंती (जो उसी दिन पड़ती है) के साथ धर्मपाल जी के शोध का कुछ विस्तार से ज़िक्र भी किया।…

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