Category: All Articles

  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (vii) Colonial Making of Contemporary Indian Mind

    सन 1824 में कलकत्ता के पास बेरेकपुर में भारतीय सैनिकों ने एक सैन्य विद्रोह किया था, जिससे अंग्रेज़ बहुत ही घबरा गए थे, लेकिन उसके चंद सालों में ही तत्कालीन गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने लंदन स्थित अपने उच्च अधिकारियों के नाम एक चिठ्ठी लिखी थी, जिसमें उसने लिखा था कि Now there is nothing

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (vi) Civilizational Reliability on Test of Time

    किसी भी क्रिया के त्वरित परिणाम भी हो सकते हैं और दूरगामी भी हो सकते हैं। क्रिया के होते ही त्वरित परिणाम तो दिख जाते हैं, किन्तु दूरगामी असरों को जानने के लिए तो समय के साथ उसकी समीक्षा होती रहनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर आज यदि कोई कोरोना की दवाई निकाल कर कहे,

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (v) Newness Seeking

    आधुनिक दिमाग एक भ्रम में जीता है। किसी बड़ी डिग्री वाले ने या किसी बड़े पुरस्कार विजेता ने कुछ कह दिया, तो वह उसे मान लेता है, उससे प्रभावित हो जाता है, अब चाहे वह खुद उस बात को समझता हो या ना हो। ये एक प्रकार की मान्यता है, परंपरा में भी मान्यता का

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  • Video series: Deconstructing Modernity: Part (iv) – Restlessness

    आधुनिक व्यक्ति के शरीर और मन सदैव गतिशील रहते हैं, स्थिर नहीं रह पाते हैं। यही अनावश्यक गतिशीलता हड़बड़ाहट, थकान और भय को जन्म देती है। स्थिरता के अभाव में वह बड़ी सरलता से किसी से भी प्रभावित होने लगता है और यहीं से वह भय एवम् भ्रम से ग्रसित होने लगता है।

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  • Video Series- Deconstructing Modernity: Part (iii) Civilizational mind and the Unknown

    अलग अलग सभ्यताओं में अलग अलग भाषाएँ अलग अलग बोलियाँ बोली जाती हैं। ये भाषाएँ व बोलियाँ वहाँ की मान्यताओं को, वहां की सोचने समझने की प्रक्रिया को दर्शाती भी हैं व बनाती भी हैं। अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं की रचना में व उपयोग में कुछ प्रमुख भेद हैं, ये भेद इन सभ्यताओं की मूलभूत

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  • Video series: Deconstructing Modernity: Part (ii) Fear of Unknown in Modern Mind

    Deconstructing Modernity शृंखला के भाग – १ में हमने देखा कि कैसे भय का वातावरण सब तरफ खड़ा किया गया है।यहां भय दो प्रकार का है, एक तो कोरोना का भय है और एक भयभीत होने की मनोस्थिति है। दोनों ही तरह के भय से पार पाने की चेष्टा साधारण व्यक्ति की अलग होती है

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  • Video: Deconstructing Modernity: Part (i) Fear of Corona:

    भारत में प्रतिदिन औसतन २७००० मौतें होती हैं, जबकि कोरोना से होने वाली मौतें उसकी तुलना में बहुत ही कम हैं, फिर भी वैश्विक मीडिया के द्वारा इसे इतने बड़े भय के स्वरूप में प्रसारित किया जा रहा है। यह एक ऐसा प्रयोग है कि जिसमें मीडिया के द्वारा समग्र विश्व के मनोभावों को नियंत्रित

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  • Possibilities of Discovery

    Possibilities of Discovery

    It appears to me that many of today’s social issues which look unsolvable, have become so because of the political system within which we are seeking answers. Let us take together the three issues of the Jallikattu (bull taming ceremony) in Tamil Nadu, the Dahi-handi during Gokulashtami in Maharashtra, and the Kaveri river-sharing tussle between

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  • भारत की आत्मा

    भारत की आत्मा

    प्रवचन: आश्रम में प्रार्थना के बाद मिल मजदूरों के साथ –  (मार्च 17, 1918) (गांधीजी का यह प्रवचन अत्यंत महत्वपूर्ण है। अहमदाबाद के मिल मजदूरों की हड़ताल के बाफी दिनों बाद गांधीजी अनशन पर बैठने का निर्णय लेते हैं। यह निर्णय उनके लिए काफी दुविधा उत्पन्न करता है। इस दुविधा को वे इस प्रवचन में

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  • बच्चे प्रदर्शन की वस्तु नहीं हैं

    बच्चे प्रदर्शन की वस्तु नहीं हैं

    अभी हाल ही में अपने दिल्ली प्रवास के दौरान अपने एक पुराने मित्र के घर जाने का अवसर प्राप्त हुआ। तमाम औपचारिकताओं के दौरान उन्होनें अपने ढाई साल के बच्चे का परिचय कराया। परिचय और साधारण सी होने वाली बातचीत जल्द ही बच्चे के विविध सूचना रूपी सीख एवं कला के प्रस्तुति और प्रदर्शन में

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